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उत्तर प्रदेशबस्ती

स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे बस्ती में चल रहा प्राइवेट अस्पतालों का लूटतंत्र

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। प्राइवेट हॉस्पिटलों में डिलीवरी के नाम पर लूट, चार गुना वसूली में दलालों की भी हिस्सेदारी।।

🚑 स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे बस्ती में चल रहा प्राइवेट अस्पतालों का लूटतंत्र।

बस्ती।जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है। सरकारी अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी और डॉक्टरों की अनुपस्थिति के चलते गर्भवती महिलाएं प्राइवेट अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं। लेकिन यही मजबूरी इन निजी अस्पतालों के लिए ‘कमाई का मौका’ बन चुकी है। डिलीवरी के नाम पर मनमानी वसूली की जा रही है, और इसमें एक संगठित दलाल गैंग की भी भूमिका सामने आ रही है। दलाल बनवाते हैं मरीज, और फिर होती है चार गुना वसूली सूत्रों के मुताबिक, जिले के कई निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों ने दलालों की एक फौज खड़ी कर रखी है, जो सरकारी अस्पतालों या गांवों से मरीजों को बहला-फुसलाकर प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती करवाते हैं। डिलीवरी के सामान्य मामलों में भी ऑपरेशन का डर दिखाकर 30 से 50 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं — जबकि यही काम सरकारी अस्पताल में मुफ्त हो सकता था।
इन दलालों को हर केस पर कमीशन मिलता है, और यह रकम अंततः गरीब मरीज के खून-पसीने की कमाई से ही निकलती है।स्वास्थ्य विभाग बना मूकदर्शक। सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि जिले का स्वास्थ्य विभाग इन अनियमितताओं से आंख मूंदे बैठा है। निजी अस्पतालों की न तो सही मॉनिटरिंग हो रही है, न ही इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई। कई अस्पताल बिना पंजीकरण, बिना योग्य डॉक्टर और बिना न्यूनतम मानकों के ही संचालित हो रहे हैं। लेकिन विभागीय अधिकारी केवल कागजों पर रिपोर्ट बनाकर खानापूर्ति में लगे हैं।मरीजों की मजबूरी बन गई है प्राइवेट अस्पताल जानासरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की अनुपलब्धता, समय पर एंबुलेंस न मिलना, दवाओं की कमी, और अक्सर कर्मचारियों का असहयोगी रवैया — ये सब कारण हैं कि मरीज खासकर प्रसूता महिलाएं सरकारी अस्पतालों पर भरोसा नहीं कर पा रही हैं। मजबूरी में उन्हें निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है, जहां लूट और अपमान दोनों झेलना पड़ता है।क्या बस्ती का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह निजी अस्पतालों के आगे नतमस्तक हो चुका है?क्या शासन इस लूट पर कोई सख्त कार्रवाई करेगा?

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